Monday, August 6, 2018

नहाने से पहले और नहाने के बाद रामायण चौपाई

जो प्रभु दीनदयाला कहवा I
आरति हरन बेद जस गावा II
जपहि नामु जन आरत भारी I
मिटहिं कुसंकट होहिं सुखारी II
दीनदयाल बिरद संभारी I
हरहु नाथ मम संकट भारी II

( मिटटी  का दिया और घी की बत्ती )