Monday, August 6, 2018

नहाने से पहले और नहाने के बाद रामायण चौपाई

जो प्रभु दीनदयाला कहवा I
आरति हरन बेद जस गावा II
जपहि नामु जन आरत भारी I
मिटहिं कुसंकट होहिं सुखारी II
दीनदयाल बिरद संभारी I
हरहु नाथ मम संकट भारी II

( मिटटी  का दिया और घी की बत्ती )

Wednesday, July 20, 2016

राशी zodiac signs

1.-मेष- चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो,
राशि स्वरूप: मेंढा जैसा, राशि स्वामी- मंगल।
राशि चक्र की सबसे प्रथम राशि मेष है। जिसके स्वामी मंगल है।

2.- वृष- ई, , , , वा, वी, वू, वे, वो
राशि स्वरूप- बैल जैसा, राशि स्वामी- शुक्र।
इस राशि का चिह्न बैल है।

3.- मिथुन- का, की, कू, , , , के, को,
राशि स्वरूप- स्त्री-पुरुष आलिंगनबद्ध, राशि स्वामी- बुध।
यह राशि चक्र की तीसरी राशि है।

4.- कर्क- ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो
राशि स्वरूप- केकड़ा, राशि स्वामी- चंद्रमा।
राशि चक्र की चौथी राशि कर्क है।

5.- सिंह- मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे
राशि स्वरूप- शेर जैसा, राशि स्वामी- सूर्य।
सिंह राशि पूर्व दिशा की द्योतक है।

6.- कन्या- ढो, पा, पी, पू, , , , पे, पो
राशि स्वरूप- कन्या, राशि स्वामी- बुध।
इस राशि का चिह्न हाथ में फूल लिए कन्या है।

7.- तुला- रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते
राशि स्वरूप- तराजू जैसा, राशि स्वामी- शुक्र।
 तुला राशि का चिह्न तराजू है

8.- वृश्चिक- तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू
राशि स्वरूप- बिच्छू जैसा, राशि स्वामी- मंगल।
वृश्चिक राशि का चिह्न बिच्छू है और यह राशि उत्तर दिशा की द्योतक है।

9.- धनु- ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे
राशि स्वरूप- धनुष उठाए हुए, राशि स्वामी- बृहस्पति।
धनु द्वि-स्वभाव वाली राशि है। इस राशि का चिह्न धनुषधारी है। 

10.- मकर- भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी
राशि स्वरूप- मगर जैसा, राशि स्वामी- शनि।
मकर राशि का चिह्न मगरमच्छ है।

11.- कुंभ- गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा
राशि स्वरूप- घड़े जैसा, राशि स्वामी- शनि।
कुंभ राशि का चिह्न घड़ा लिए खड़ा हुआ व्यक्ति है।

12.- मीन- दी, दू, , , , दे, दो, चा, ची
राशि स्वरूप- मछली जैसा, राशि स्वामी- बृहस्पति।
मीन राशि का चिह्न मछली होता है। 

Wednesday, June 29, 2016

पृथ्वी से सूर्य की दुरी एवं अन्य

"जुग सहस्त्र योजन पर भानु 
लील्यो ताहि मधुर फल जानू ।।"



एक महत्वपूर्ण तथ्य जो प्रमाणित करता है कि पृथ्वी और सूर्य के मध्य की दूरी न्यूटन से पहलेतुलसीदास जी ने वर्णित किया है 

अर्थात हनुमान जी ने 15,36,00,000 (पंद्रह करोड़ छतीस लाख ) किलो मीटर पृथ्वी से दूरी पे सूर्य कोमधुर (मीठाफल जानकार लील्यो (निगल लिया

युग शब्द चार के अर्थ में प्रयुक्त होता है

सतयुग दिव्य वर्ष में 4800 वर्ष सौर वर्षों में 1728000 वर्ष
त्रेतायुग दिव्य वर्ष में 3600 वर्ष सौर वर्षों में 1296000 वर्ष
द्वापरयुग दिव्य वर्ष में 2400 वर्ष सौर वर्षों में 864000 वर्ष
कलियुग दिव्य वर्ष में 1200 वर्ष सौर वर्षों में 432000 वर्ष 

चतुर्युग का मान सौर वर्षों में अधिकाँश व्यक्ति जानते हैं  किन्तु चतुर्युग का मान

दिव्य वर्षों में 12000 है        एक जुग 12000  वर्ष 

12000 (जुग) X 1000 (सहस्त्र) X 8 (1 योजन = 8 मील) = 9,60,00,000 मील
9,60,00,000 मील X 1.6 (1 मील = 1.6 किलो मीटर)= 15,36,00,000 किलो मीटर

हम जानते हैं कि पृथ्वी की दूरी लगभग  15,00,00,000 (पंद्रह करोड़ किलो मीटरहै 

जब कि तुलसीदास जी ने बड़ी सरलता से महज चार लाईन में ये दूरी बता दी थी 




ब्रह्मा का एक दिन बराबर है:
(14 गुणा 71 महायुग) + (15 x 4 चरण)
= 994 महायुग + (60 चरण)
= 994 महायुग + (6 x 10) चरण
= 994 महायुग + महायुग
= 1,000 महायुग


30 ब्रह्मा के दिन ब्रह्मा का मास (दो खरब 59 अरब 20 करोड़ मानव वर्ष)
12 ब्रह्मा के मास = ब्रह्मा के वर्ष (31 खरब 10 अरब करोड़ मानव वर्ष)
50 ब्रह्मा के वर्ष = परार्ध
परार्ध= 100 ब्रह्मा के वर्ष= महाकल्प (ब्रह्मा का जीवन काल)(31 शंख 10 खरब 40अरब मानव वर्ष)
ब्रह्मा का एक दिवस 10,000 भागों में बंटा होता हैजिसे चरण कहते हैं:
चारों युग
चरण (1,728,000 सौर वर्ष)
चरण (1,296,000 सौर वर्ष)
चरण (864,000 सौर वर्ष)
चरण (432,000 सौर वर्ष)




हनुमानजी को मनाने और उनकी कृपा प्राप्त करने का सबसे सरल उपाय है हनुमान चालीसा का पाठ करना। हनुमान चालीसा बहुत ही सरल और मन को शांति प्रदान करने वाली स्तुति है।

जो लोग धन अभाव से ग्रस्त हैं या घर-परिवार में परेशानियां चल रही हैं या ऑफिस में समस्याएं आ रही हैं या समाज में सम्मान नहीं मिल रहा है या स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हैं तो इन्हें दूर करने के लिए हनुमान चालीसा का जप करना चाहिए। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार हनुमान चालीसा के जप से कुछ ही समय में सभी परेशानियां दूर हो सकती हैं।

जो लोग मस्तिष्क से संबंधित कार्य में लगे रहते हैं और मानसिक तनाव का सामना करते हैं तो रोज रात को सोने से पहले हनुमान चालीसा का जप करते हुए ध्यान करें।

यदि आप पूरी हनुमान चालीसा का जप नहीं कर सकते हैं तो इन पंक्तियों का जप कम से कम 108 बार करें...

बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरो पवन कुमार।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहि हरेहू कलेश विकार।

इस पंक्ति में हनुमान से यही प्रार्थना की गई है कि हे प्रभु मैं खुद को बुद्धि हीन मानकर आपका ध्यान करता हूं। कृपा करें और मुझे शक्तिबुद्धिविद्या दीजिए। मेरे सभी कष्ट-क्लेश दूर कीजिए।

बुरे सपनों और डर से बचने के लिए

जिन लोगों को बुरे सपने आते हैंसोते समय डर लगता हैंउन्हें सोने से पहले इन पंक्तियों का जप करना चाहिए...
भूत-पिशाच निकट नहीं आवे।
महाबीर जब नाम सुनावे।
इस पंक्ति के माध्यम से भक्त द्वारा हनुमान से भूत-पिशाच आदि के डर से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की जाती है।
सोने से पहले जो भी व्यक्ति इस पंक्ति का जप पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ करता हैउसे न तो बुरे सपने आते हैं और न ही कोई भय सताता है।

बीमारियों से बचने के लिए

यदि कोई व्यक्ति भयंकर बीमारी से ग्रस्त है और दवाओं का असर भी ठीक से नहीं हो पा रहा है तो सोने से पहले इस पंक्ति का जप करना चाहिए...
नासे रोग हरे सब पीरा।
जो सुमिरे हनुमंत बलबीरा।।
इस पंक्ति से हम बजरंग बली से सभी प्रकार रोगों और पीड़ाओं से मुक्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। जो भी बीमार व्यक्ति इन पंक्तियों का जप करके सोता हैउसकी बीमारी जल्दी ठीक हो जाती है। ध्यान रखें इस उपाय के साथ ही डॉक्टर द्वारा बताई गई सावधानियों का ध्यान रखेंदवाइयां समय पर लेते रहें।
मान-सम्मान पाने के लिए
यदि कोई व्यक्ति सर्वगुण संपन्न बनना चाहता है और घर-परिवारसमाज में वर्चस्व बनाना चाहता है,मान-सम्मान पाना चाहता है तो उसे सोने से पहले इस पंक्ति का जप करना चाहिए...
अष्ट-सिद्धि नवनिधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।।

इस पंक्ति के अनुसार हनुमान अष्ट सिद्धियां और नौ निधियों के दाता है जो कि उन्हें माता सीता ने प्रदान की है। जिन लोगों के पास ये सिद्धियां और निधियां आ जाती हैंवे समाज में और घर-परिवार में मान-सम्मानप्रसिद्धि पाते हैं। इस पंक्ति के जप से हनुमानजी भक्त पर अपनी कृपा बरसाते हैं और दुख दूर करते हैं। मान-सम्मान पाने के लिए स्वयं हमें भी सही प्रयास करने चाहिए।

बुरे विचारों से मुक्ति के लिए
महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।।

यदि कोई व्यक्ति हनुमान चालीसा की इस पंक्ति का जप करता है तो उसे सुबुद्धि प्राप्त होती है। इस पंक्ति का जप करने वाले लोगों के कुविचार नष्ट होते हैं और सुविचार बनने लगते हैं। बुराई से ध्यान हटता है और अच्छाई की ओर मन लगता है।
इस पंक्ति का अर्थ यह है कि बजरंगबली महावीर हैं और हनुमानजी कुमति को निवारते हैं यानी कुमति को दूर करते हैं। बजरंग बली सुमति यानी अच्छे विचारों को बढ़ाते हैं।

शत्रुओं पर विजय पाने के लिए
 
भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्रजी के काज संवारे।।
 
जब आप शत्रुओं से परेशान हो जाएं और कोई रास्ता दिखाई न दे तो हनुमान चालीसा की इस चौपाई का कम से कम 108 बार जप करें। यदि एकाग्रता और भक्ति के साथ हनुमान चालीसा की सिर्फ इस पंक्ति का जप किया जाए तो शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। श्रीराम की कृपा प्राप्त होती है।
 
इस पंक्ति का अर्थ यह है कि श्रीराम और रावण के बीच हुए युद्ध में हनुमानजी ने भीम रूप यानी विशाल रूप धारण किया था। इसी भीम रूप से असुरों-राक्षसों का संहार किया। श्रीराम के काम पूर्ण करने में हनुमानजी ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। जिससे श्रीराम के सभी काम संवर गए।
 
 
विद्या धन पाने के लिए
 
बिद्यबान गुनी अति चातुर।
रामकाज करीबे को आतुर।।
 
यदि किसी व्यक्ति को विद्या धन चाहिए तो उसे इस पंक्ति का विशेष रूप से जप करना चाहिए। इस पंक्ति के जप से हमें विद्या और चतुराई प्राप्त होती है। इसके साथ ही हमारे हृदय में श्रीराम की भक्ति भी बढ़ती है।
 
इस चौपाई का अर्थ है कि हनुमानजी विद्यावान और गुणवान हैं। हनुमानजी बहुत चतुर भी हैं। वे सदैव ही श्रीराम सेवा करने के लिए तत्पर रहते हैं। जो भी व्यक्ति इस चौपाई का जप करता है, उसे हनुमानजी से विद्या, गुण, चतुराई के साथ ही, श्रीराम की भक्ति प्राप्त होती है।